ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल कैसे काम करता है ?

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ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल कैसे काम करता है ?

आज के इस आर्टिकल में हम आपको ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के बारे में हिंदी में बताएँगे की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल कैसे काम करता है ? ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की मारक क्षमता कितनी है ? ब्रह्मोस मिसाइल का नाम ब्रह्मोस कैसे पड़ा ? आदि रोचक जानकारियाँ आपके साथ साझा करेंगे | तो चलिए जानते है इसके बारे में |

इस आर्टिकल में हम निम्नलिखित प्रश्नो के उत्तर जानेंगे |

  • ब्रह्मोस मिसाइल इंजन कैसे शुरू होता है ?
  • ब्रह्मोस को सुपरसोनिक गति कैसे मिलती है ?
  • रैमजेट इंजन कैसे काम करते हैं ?
  • ब्रह्मोस रोचक तथ्य ?
  • रैमजेट इंजन की गति ?
  • सुपरसोनिक क्या है ?
  • Mach 1  Mach 2 क्या है ?
  • ब्रह्मोस मिसाइल वैरिएंट ?

पृथ्वी पर कोई दूसरी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल इसके टक्कर की नहीं है

ब्रह्मोस इतनी ज्यादा पावरफुल मिसाइल है कि इससे फास्ट पूरी पृथ्वी पर कोई दूसरी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है ही नहीं और पता है यह हम इंडियंस ने बनाई है और इस पावरफुल मिसाइल की इंटरेस्टिंग बात यह है कि इसके इंजन को स्टार्ट करने के लिए 1200 किलोमीटर पर आवर की स्पीड चाहिए उससे पहले तो यह स्टार्ट ही नहीं होता है और इसकी यह जो स्पीड है ना वह साउंड की स्पीड से 3 गुना ज्यादा है जो अभी इंडिया यूज कर रहा है उसकी ब्रह्मोस पूरी पृथ्वी  की सबसे फास्ट सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है

भारत और रूस की पार्टनरशिप

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यह इंवेंशन इन भारत और रूस की 50% पार्टनरशिप में बना हुआ है ब्रह्मोस मिसाइल में जो इंजन यूज होता है उसका नाम है रैमजेट इंजन और इस इंजन की खास बात यह है कि इसके अंदर ऐसा कोई पार्ट नहीं है जो रोटेट करता है मतलब इसके इंजन में कोई रोटेटिंग पार्टी नहीं है जैसे हमारी गाड़ी में कितनी चीजें घूमती है तब जाकर हमारे गाड़ी चलती है | और यह इंजन इतना फास्ट है कि रडार को पता भी नहीं चलता कि उसके सामने से कोई मिसाइल निकली है इसके अलावा जब इस मिसाइल को लांच किया जाता है तो इसको किसी टारगेट पर लॉक किया जाता है जैसे कोई एयरक्राफ्ट है उसको उठाना है अब जैसे ही इस ब्रह्मोस मिसाइल को फायर किया जाता है और यदि उस टारगेट को पता चल गया कि मेरे पीछे ब्रह्मोस मिसाइल लगी है वह टारगेट एयरक्राफ्ट इधर उधर भागने की कोशिश करेगा तो यह मिसाइल इतनी पावरफुल है कि जिधर जिधर यह टारगेटेड एयरक्राफ्ट भागने की कोशिश करेगा उसके पीछे-पीछे यह मिसाइल वहां तक जाएगी जहां तक यह एयरक्राफ्ट जाएगा और उस एयरक्राफ्ट को डिस्ट्रॉय करके ही रहेगी चाहे वह किधर ही जाए इस मिसाइल को जमीन से हवा से और सबमरीन से लांच किया जा सकता है और यह जमीन से 5 मीटर की ऊंचाई पर उड़ सकती है और 300 किलोग्राम तक विस्फोटक मटेरियल लेकर जा सकती है

ऐसा कौन सा ब्रह्मास्त्र भारत और रूस ने इसमें लगा दिया जो यह इतनी पावरफुल और दुनिया की इकलौती सबसे तेज़ मारक क्षमता वाली क्रूज मिसाइल बन गई ?

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देखिए जब कोई युद्ध होता है ना तो उसमें सबसे ज्यादा स्पीड का इफेक्ट पड़ता है यदि दुश्मन का एयरक्राफ्ट आपकी स्पीड से 1 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से भी ज्यादा दौड़ रहा है यानिकी रफ्त्तार में थोड़ा बहुत अंतर भी हो तो वह बच कर निकल जाएगा लेकिन ब्रह्मोस मिसाइल दुश्मन को यह मौका नहीं देती है और उसके पीछे इसका सबसे पावरफुल इंजन जिसका नाम है ” रैमजेट इंजन ”

सुपरसोनिक स्पीड से तेज़

जहां एयरप्लेन का इंजन बहुत ही कॉन्प्लेक्स इंजन होता है जिसके अंदर बहुत सारे टरबाइन लगे रहते हैं कंप्रेसर लगा रहता है और एक बहुत ही बड़ा टर्बो फैन लगा रहता है तो इसकी वजह से जो एयरप्लेन का इंजन है उसकी स्पीड ज्यादा नहीं हो पाती क्योंकि हवा का ड्रैग फोर्स इस जेट इंजन को इतना परेशान करता है कि वह 1000 – 1200 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से ज्यादा जा ही नहीं पाता | अब यदि आपका फाइटर जेट है तो इतनी स्पीड से तो काम चलेगा नहीं हमको तो चाहिए स्पीड बहुत ज्यादा 4000 या 5000 किलोमीटर पर आवर की स्पीड या इससे भी ज्यादा तब साइंटिस्ट ने दिमाग लगाया और यह जो टरबाइन कंप्रेसर है इनको हटा दिया गया इस इंजन में से जब इनको हटाया गया तो इंजन के सामने ज्यादा हवा का ड्रैग फोर्स रहा ही नहीं तो इंजन की स्पीड बढ़ गई है कि यहां पर मैं आपको एक बात बताता हूं – जैसे हमारी गाड़ी सड़क पर चलती है तो फ्रिक्शन की वजह से गाड़ी आगे बढ़ती है लेकिन जो हवा का परीक्षण होता है ना वह सड़क वाली परीक्षण से बहुत ही ज्यादा खतरनाक होता है | वह इतना खतरनाक होता है कि यदि हम सुपरसोनिक स्पीड को क्रॉस करते हैं तो एयर के फ्रिक्शन की वजह से उसमें आग भी लग सकती है

सुपरसोनिक स्पीड क्या है ?

इंजन में सुपरसोनिक स्पीड होती है जो साउंड की स्पीड होती है उसको यदि हम पार करके आगे निकलते हैं तो उसको सुपर सोने की स्पीड देते हैं | और यह जो ब्रह्मोस मिसाइल है यह सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है जो Mach 2.8 तक जाती है

Mach क्या है ?

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यहां Mach 2 Mach 3 और Mach 2.8 का मतलब है | जैसे –

  • Mach 2 है तो साउंड से 2 गुना ज्यादा स्पीड
  • Mach 3 है तो साउंड से 3 गुना ज्यादा स्पीड

अब यह जो रैमजेट इंजन है ना इसका थोड़ा सा अपन कंसेप्ट समझते हैं इसकी टेक्नोलॉजी को देखकर आप भी सोचोगे कि यार इंजीनियर ने भी कितनी ऊंचाई पर जाकर दिमाग लगाया |

शॉकवेव

आपने कभी पानी में पत्थर तो फेंका ही होगा और जब भी पानी में पत्थर फेंकते हैं तो ऐसे हुए जनरेट होती है पानी मान लो कि आप पानी में पत्थर फेंकते हैं और पत्थर से एक धागा बांधकर उसको अपनी तरफ खींचते हैं तो जो पानी में वेव जनरेट होगी वह इस टाइप से होगी जैसे कि पत्थर के आगे वाले सिरे से वेव निकल रही है और पीछे की तरफ जा रही है और यही कंसेप्ट होता है यह जो हमारे एयरप्लेन होते हैं उनमें जैसे मान लो हमारा एयरप्लेन साउंड की स्पीड के साथ में चल रहा है तो पीछे की तरफ जो शॉकवेव जा रही है उनको देखकर ऐसा लगेगा जैसे एयरप्लेन के आगे वाली सिरे से शॉकवेव निकल रही है और पीछे की तरफ जा रही है अब यह जो कंडीशन है ना इस कंडीशन में जो एयरप्लेन के आगे की नोक है उसे इतनी ज्यादा शॉकवेव निकलती है कि एयरक्राफ्ट के सामने एक शॉकवेव की दीवार से खड़ी हो जाएगी जिसको यह एयरप्लेन पारी नहीं कर पाएगा और सुपर सोनिक स्पीड तक पहुंची नहीं पाएगा तो पुराने जमाने में जो एयरक्राफ्ट थे वह इस शॉकवेव की जो दीवार है इसको पारी नहीं कर पाते उससे पहले ही ब्लास्ट हो जाते हैं और यह जो पैसेंजर एयरप्लेन है यह भी इस शॉकवेव की दीवार को पार नहीं कर पाते हैं क्योंकि इनके अंदर जेट इंजन यूज़ होता है और जेट इंजन को हवा का ड्रैग फोर्स का सामना बहुत ज्यादा करना पड़ता है अब सोचो कि यदि हमारा जो एयरक्राफ्ट है वह यदि साउंड की स्पीड से भी ज्यादा फास्ट चलेगा तो यह जो सोकर की दीवार है इसको तोड़ कर यह आगे निकल जाएगा और सुपर सोनिक की स्पीड तक पहुंच जाएगा तो हवा का ड्रैग फोर्स है वह भी थोड़ा कम हो जाएगा |

1236 किलोमीटर प्रति घंटा

लेकिन जो एयरक्राफ्ट की अगली नोक है वहां पर वातावरण का दबाव 29 गुना तक बढ़ जाएगा और टेंपरेचर भी बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा वैसे आप कंफ्यूज नहीं हो इसलिए मैं बता देता हूं कि जो ​सुपर सोनिक की स्पीड है वह 1236 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड को यदि कोई एयरक्राफ्ट पार करता है तो वह साउंड की स्पीड से ज्यादा स्पीड में चलने लग जाएगा और सुपर सोनिक स्टेज में पहुंच जाएगा तो साइंटिस्ट नहीं यहीं पर थोड़ा दिमाग लगाया और सोचा कि जब हम सुपर सोने की स्पीड को पार करते हैं तो हवा का प्रेशर और टेंपरेचर भी बहुत ज्यादा होगा तो क्यों ना इस हवा के टेंपरेचर और प्रेशर को यूज में ले कर हमारा जो जेट इंजन है उस को आगे बढ़ाया जाए तो उसको पावर भी ज्यादा मिलेगी और इंजन में जो फ्यूल की खपत हो रही है वह भी कम होने लग जाएगी क्योंकि नेचुरल फ्यूल जो हवा हीटेड है उसको ही हम यूज कर रहे हैं जो फ्यूल के रूप में और यह जो हाई प्रेशर और टेंपरेचर वाली हवा है इसी से यह रेट इंजन चलता है|

Mach 1 और Mach 2 की स्पीड

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इसलिए यह जो ब्रह्मोस मिसाइल है इसको पहले सुपरसोनिक स्पीड तक पहुंचाया जाता है तब जाकर इसका इंजन स्टार्ट होता है और सुपर सोनिक की स्पीड तक इसको पहुंचने के लिए इसमें रॉकेट इंजन लगे रहते हैं जो इस मिसाइल को Mach 1 और Mach 2 की स्पीड तक पहुंचा सकते हैं | जब इसको जमीन से लांच किया जाता है तब और यदि इसको एयरक्राफ्ट से लांच किया जाता है तो एयरक्राफ्ट की तो खुद की स्पीड बहुत ज्यादा होती है तो वह तो सुपरसोनिक स्पीड पर इस मिसाइल को लॉन्च कर दिया जाता है | अब इस रैमजेट इंजन को देखते हैं इसके जो आगे वाला हिस्सा है इसको बोलते हैं डिफ्यूजर सेक्शन | जब हाई प्रेशर एंड टेंपरेचर वाली हवा इधर से प्रवेश करती है तो यह हवा का टेंपरेचर और प्रेशर और ज्यादा बढ़ा देता है जैसे ही हवा इस डिफ्यूजर को पार करके आगे निकलती है तो आगे लगा रहता है कंबशन चेंबर जहां पर फ्यूल जलता है तो यह आगे से जो हाई प्रेशर और टेंपरेचर वाली हवा आ रही है इसके अंदर इस फ्यूल को मिक्स कर दिया जाता है और जैसे ही इसमें फ्यूल मिक्स होता है तो इस हवा के पास में और ज्यादा एनर्जी आ जाएगी तो इस इंजन के लास्ट में एक नोजल लगा रहता है जिसको कन्वर्जेंट एंड डायवर्जेंट नोजल बोलते हैं यह नोजल जो भी कंबशन चेंबर के अंदर फ्यूल जल रहा है उसको पहले कंप्रेस करता है और फिर बाहर की तरफ छोड़ देता है |

Mach 3 और Mach 6 तक की स्पीड

जिसे इंजन को आगे की तरफ फोर्स लगता है और इंजन हाई स्पीड में आगे बढ़ता है और यह रैमजेट इंजन है ना यह Mach 3 और Mach 6 तक की स्पीड तक भी जा सकता है | Mach 6 का मतलब है साउंड की स्पीड से 6 गुना ज्यादा स्पीड और यदि आप इस रैमजेट इंजन को देखोगे तो इसके अंदर कोई मूविंग पार्ट नहीं है आगे से हवा एंटर होती है और सीधे पार हो जाती है इसके अंदर से तो हवा को कोई रोकने वाला है ही नहीं इसलिए इसके अंदर ज्यादा ड्रैग फोर्स क्रिएट नहीं होता है इसलिए यह बहुत ही ज्यादा हाई स्पीड तक जा सकता है और यह जो एयरप्लेन का जेट इंजन है उसके अंदर बहुत सारे कंपोनेंट लगे रहते हैं इसलिए वह ज्यादा स्पीड में नहीं चल पाता

आफ्टरबर्नर स्विच

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ब्रह्मोस-सुपरसोनिक-क्रूज-मिसाइल-कैसे-काम-करता-है

आजकल जो लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के एयरक्राफ्ट आते हैं वह सुपर सोनिक स्पीड को पार करके जा सकते हैं लेकिन उनमें सबसोनिक टर्बोफैन जेट इंजन यूज होता है जिसके अंदर टरबाइन और कंप्रेसर लगे रहते हैं और जब इन इंजन को सुपरसोनिक स्पीड में जाना होता है तो इनके अंदर एक आफ्टरबर्नर स्विच होता है उसको ऑन किया जाता है इंजन से फिर ऐसे आग निकलती है आपने मूवी में तो देखा ही होगा की एक हीरो गाड़ी में एक लाल रंग का बटन दबाता है और गाडी में से आग निकलती है और गाडी की स्पीड राकेट जैसी हो जाती है और इंजन बहुत ज्यादा हाई स्पीड में चलने लग जाता है कुछ ऐसा ही होता है आफ्टरबर्नर स्विच लेकिन यह ज्यादा देर तक आफ्टरबर्नर स्विच यूज़ नहीं कर सकते वरना इंजन के टरबाइन और कंप्रेसर पिघल जाएंगे इस फूल के टेंपरेचर से इसलिए यह एयरक्राफ्ट आफ्टरबर्नर स्विच का यूज़ तभी करते हैं जब इनको रडार से बच ना होता है या फिर कोई मिसाइल से बचना होता है तो यह था ब्रह्मोस मिसाइल और इसके इंजन के बारे में एक इंफॉर्मेशन कैसे लगी आपको जरूर से कमेंट बॉक्स में बताना |

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