Electric Cars vs Petrol and Diesel Cars in Hindi

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आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे है | इलेक्ट्रिक कार और पेट्रोलडीजल कार के बारे में, Electric Cars vs Petrol and Diesel Cars in Hindi , इलेक्ट्रिक कार Vs पेट्रोल-डीजल कार, कौन सी कार लेनी चाहिए | साथ ही हम इनसे जुड़ी बहुत सी महत्वपूर्ण बाते आपके साथ साझा करेंगे | तो चलिए जानते है इनके बारे में |

इलेक्ट्रिक कार Vs पेट्रोल-डीजल कार

1990 में इलेक्ट्रिक कार्य अपने सबसे सुनहरी दिनों में थी लेकिन पेट्रोल इंजन कारों में अचानक बढ़ोतरी के कारण और बैटरी से जुड़ी तकनीकी अक्षमताओं ने 1920 तक आते-आते इलेक्ट्रिक कारों का चरण खत्म कर दिया हालांकि बैटरी टेक्नोलॉजी और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स में हाल ही में हुई तरक्की के कारण इलेक्ट्रिक कारों ने एक मजबूत वापसी की है हम इन दोनों बेहद अलग अलग तकनीकों की पूरी तरह से एक वैज्ञानिक तुलना करेंगे और यह देखेंगे कि कौन सी तकनीक बेहतर है|

प्रमुख भूमिका

एक आईसी इंजन पेट्रोल कारों में एक प्रमुख भूमिका निभाता है इंजन को दिया गया फ्यूल सिस्टम्स को चलाने के लिए कंबशन और पर्याप्त प्रचार एवं टेंपरेचर एनर्जी पैदा करता है पिस्टन के लीनियर मोशन को एक स्लाइडर क्रैंक मेकैनिज्म की मदद से रोटरी मोशन में ट्रांसफर किया जाता है और फिर एक ट्रांसमिशन का उपयोग करके इस रोटेशन को गाड़ी के पहियों पर ट्रांसफर किया जाता है एक इलेक्ट्रिक कार में पावर का सोर्स एक बैटरी एक होता है एक इनवर्टर की मदद से हम डीसी बैटरी पावर को तीन फेज एसी में कन्वर्ट करते हैं थ्री फेज एसी एक इंडक्शन मोटर को चालू करेगा जिससे फिर ड्राइविंग चालू होंगे

इलेक्ट्रिक कार और पेट्रोल-डीजल कार की तुलना

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एक आईसी इंजन में फाॅर्स और पावर का प्रोडक्शन कभी भी एक जैसा नहीं होता | इसके साथ की कंपोनेंट्स काफी हद तक मैकेनिकल बैलेंस सिंह की समस्याएं पैदा करते हैं इसके अलावा इंजन खुद से चालू नहीं होता इन दिक्कतों को हल करने के लिए कई एक्सेसरीज की जरूरत होती है जो की आईसी इंजन को काफी भारी बना देती है इलेक्ट्रिक मोटर में ऐसी परेशानियां नहीं आती है इंडक्शन मोटर स्टेटस द्वारा जनरेट की गई एक रोटेटिंग मैग्नेटिक फील्ड की मदद से काम करती है आप एसी पावर इनपुट की फ्रीक्वेंसी को एडजस्ट करके मोटर की स्पीड को आसानी से कंट्रोल कर सकते हैं वे यूनिफॉर्म पावर आउटपुट प्रोड्यूस करते हैं | और खुद से चालू हो जाते हैं इन कारणों से एक इंडक्शन मोटर एक आईसी इंजन की तुलना में काफी हल्का होता है और साथ ही यह ज्यादा पावर और ज्यादा टॉर्क आउटपुट पैदा करता है |

यह नोट करना काफी इंटरेस्टिंग है| कि दोनों ही आईसी इंजन और इंडक्शन मोटर को कॉलिंग की जरूरत पड़ती है एक निश्चित सीमा के भीतर टेंपरेचर को बरकरार रखने के लिए दोनों ही प्राइम मूवर्स को उत्पन्न हो रही वेस्ट हीट को रिजेक्ट करना जरूरी है हालांकि यहां यह जानना दिलचस्प होगा कि इंडक्शन मोटर आईसी इंजन के मुकाबले काफी कम वेस्ट ही पैदा करता है|

आईसी इंजन कारों की सबसे अच्छी खूबी

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आईसी इंजन कारों की सबसे अच्छी खूबी यह है कि उनमें काफी आसानी से फ्यूल भरा जा सकता है एक पेट्रोल कार को 5 मिनट या उससे भी कम समय में रिफ्यूल किया जा सकता है | जबकि इस दौर में इलेक्ट्रिक कारों को फ़ास्ट चार्ज करने में कम से कम 2 घंटे लग जाता है इलेक्ट्रिक कारों के मुकाबले पेट्रोल कारों की एक और बहुत बड़ी खूबी उनकी हाई एनर्जी डेंसिटी है | अभी वाली लिथियम आयन बैटरी की एनर्जी डेंसिटी गैसोलीन के मुकाबले कुछ भी नहीं है दोनों ही कारों की यात्रा की रेंज काफी हद तक एक जैसी है आप बस उनके एनर्जी स्टोर करने की डिवाइस के आकार और वजन की तुलना कर सकते हैं बैटरी की काफी कम एनर्जी डेंसिटी इलेक्ट्रिक कार के लिए ज्यादा वजन के रूप में एक सजा बन कर आती है कहां का भारी वजन टायर और सड़क के बीच के फ्रिक्शन के कॉएफिशिएंट को काफी कम कर देता है | इससे कार को मोड़ने में मुश्किल आती है|

बैटरी पैक के गरम होने की समस्या

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बैटरी पैक में भी काफी ज्यादा हीट जनरेशन की परेशानियां है इलेक्ट्रिक कार के बैटरी पैक को खोल कर देखेंगे तो आप देखेंगे कि बैटरी पैक और कुछ नहीं बल्कि कुछ आम लिथियम आयन सेल्स का एक समूह है जिसे शायद आप अपने रोज के जीवन में उपयोग कर सकते हैं बैटरी के टेंपरेचर को सामान्य स्तर पर रखने के लिए लगातार लिक्विड कूलिंग करना जरूरी है एक्स्ट्रा हीट को एक रेडिएटर के माध्यम से बाहर के वातावरण में निकाल दिया जाता है जबकि एक पेट्रोल कार के एनर्जी स्टोरेज पार्ट को ऐसे किसी भी कूलिंग मैकेनिज्म की जरूरत नहीं होती है|

इलेक्ट्रिक कारों के बैटरी पैक के फायदे

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इलेक्ट्रिक कारों के बैटरी पैक के फायदे भी हैं क्योंकि भारी बैटरी पैग जमीन से काफी करीब होता है यह सेंटर ऑफ ग्रेविटी को कम कर देता है जिससे कार की स्टेबिलिटी बढ़ जाती है जिससे यह और ज्यादा सुरक्षित हो जाती है

  • बड़ी बैटरी पैक का फर्श पर काफी ज्यादा फैलाव इसमें साइड कोलाइज़न होने की स्थिति में स्ट्रक्चरल रिगिडीटी देने में मदद करता है| 
  • एक आईसी इंजन वाली कार में प्रदूषक और शोर के बीच में संतुलन बनाए रखने के लिए एक कॉन्प्लेक्स एग्जास्ट गैस ट्रीटमेंट की जरूरत होती है| 

पावर डायनामिक्स की तुलना

यहां इलेक्ट्रिक कार्य स्पष्ट रूप से विजेता है आईसी इंजन कारों को एक निश्चित स्पीड ट्रेन से ऊपर नहीं चलाया जा सकता है जिस वजह से हमें एक कांपलेक्स और महंगे ट्रांसमिशन मैकेनिज्म का उपयोग करना जरूरी है स्पीड कंट्रोल के लिए मोटर एक वाइड स्पीड रेंज में ज्यादा बेहतर काम कर सकती है इसलिए इलेक्ट्रिक कार में स्पीड को सीधे मोटर से कंट्रोल किया जा सकता है | जिससे हम इलेक्ट्रिक कार के लिए एक स्पीड बेरिंग ट्रांसलेशन की कोई जरूरत नहीं है इंडक्शन मोटर की स्पीड को बस आउटपुट पावर फ्रिकवेंसी को एडजस्ट करके इनवर्टर द्वारा एकदम अच्छे से कंट्रोल किया जाता है असल में पिछले दशक में इनवर्टर पावर इलेक्ट्रॉनिक्स के सॉफ्टवेयर में किए गए बदलावों ने इलेक्ट्रिक कारों की सफल वापसी में एक अहम भूमिका निभाई है इलेक्ट्रिक कार शुरुआत से ही एक शानदार टॉर्क पैदा कर सकती है | जबकि एक आईसी इंजन कार कम आरपीएम पर संघर्ष करेगी इसलिए इंजन को शुरुआत में ऑप्टिमम आरपीएम रेंज पर ले जाने के लिए एक डीसी मोटर की जरूरत पड़ती है|

इसके अलावा इलेक्ट्रिक मोटर के टॉर्क और पावर को तुरंत कंट्रोल किया जा सकता है | जिससे आईसी इंजन का रिस्पांस कम होता है जिससे दरअसल इलेक्ट्रिक कारों में बेहतर ट्रेक्शन कंट्रोल आता है | रीजेनरेटिव ब्रेकिंग के मामले में इलेक्ट्रिक कारों के पास अंतर्निहित फायदा होता है वही इंडक्शन मोटर यहां एक जनरेटर के रूप में काम करती है जबकि पेट्रोल कार में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग हासिल करने के लिए आपको अलग से एक बीएलडीसी मोटर और एक बैटरी पैक लगवाना होगा  |

कौन सी कार अधिक किफायती है ?

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एक इलेक्ट्रिक कार एक आम पेट्रोल कार के मुकाबले काफी महंगी होती है हालांकि यदि आप पूरी तस्वीर साफ देखना चाहते हैं तो आपको प्रत्येक माइल / किलोमीटर की कॉस्ट की तुलना करनी चाहिए | वर्तमान U.S गैस और बिजली की कीमतों पर आधारित गणना से पता चलता है | की इलेक्ट्रिक कारों को चलाने का खर्चा पेट्रोल कारों की तुलना में सिर्फ एक तिहाई आता है | इसके अलावा आईसी इंजन कारों की तुलना में इलेक्ट्रिक कारों की मेंटेनेंस का खर्चा भी काफी कम है जैसा कि आप सब पहले से ही जानते होंगे कि इलेक्ट्रिक कारें इंटरनल कंबशन वाली कारों की तुलना में अधिक सुरक्षित होती है क्योंकि इंटरनल कॉम्बस्शन इंजन में तकनीकी उन्नति अब करीब-करीब खत्म ही हो गई है और इलेक्ट्रिक कारों का तेजी से विकास होता ही जा रहा है कोई भी स्पष्ट रूप से देख सकता है कि इलेक्ट्रिक कारों का भविष्य आईसी इंजन कारों की तुलना में काफी बेहतर है |

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