रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम कैसे काम करता है ?

रीजेनरेटिव-ब्रेकिंग-सिस्टम-कैसे-काम-करता-है

रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम कैसे काम करता है?

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आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे है रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम के बारे में की रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम कैसे काम करता है? और इसके क्या क्या फायदे है, तो चलिए जानते है इसके बारे में | आजकल इलेक्ट्रिक कार में एक नया कंसेप्ट आ रहा है रीजेनरेटिव ब्रेकिंग बहुत से लोगों को इसके बारे में पता है और बहुत से लोगों को नहीं बताया और जिनको पता है उनको यह नहीं पता कि यह रीजेनरेटिव ब्रेकिंग काम कैसे करती है बस मोस्टली लोग यही जानते हैं कि रीजेनरेटिव ब्रेकिंग में हमारी गाड़ी अपने आप चार्ज होती है अब वह कितनी चार्ज होती है वह तो इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद ही पता चलेगा |

रीजेनरेटिव ब्रेकिंग क्या है ?

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जो लोग फ्री एनर्जी जनरेटर बनाते हैं उनका कंसेप्ट भी कुछ यहीं से निकल कर आता है और एक बार फिर से आपको यहां पर फ्री एनर्जी जनरेटर के पीछे जो कंसेप्ट है उसके बारे में पता लगेगा | रीजेनरेटिव ब्रेकिंग इसके नाम में पीछे की तरफ ब्रेकिंग लगा हुआ है इसका मतलब जब हमारी इलेक्ट्रिक कार ब्रेकिंग की सिचुएशन में आती है तब हम तो गाड़ी में ब्रेक लगाते हैं लेकिन जो गाड़ी में मोटर है उसका कुछ अलग ही व्यवहार होता है जब हम कार में ब्रेक लगाते हैं इसका मतलब हमने जो मोटर है उसकी सप्लाई बंद कर दी है यानी हम मोटर को कह रहे हैं कि आप एक बार रेस्ट करो हमें गाड़ी को रोकना है तो आप अपना फोर्स मत लगाओ और यही होता है हमारी इंजन वाले कार में हम क्लच दबाकर ब्रेक लगाते हैं ताकि इंजन की पावर को हम कट कर सके टायर से लेकिन इलेक्ट्रिक कार में हमने मोटर की सप्लाई को तो बंद कर दिया है |

ब्रेकिंग कंडीशन

लेकिन ऐसा थोड़ी है कि ब्रेक लगाते ही गाड़ी रुक जाएगी मान कर चलते हैं नॉरमल कंडीशन में कम से कम 50 मीटर की दूरी पर जाकर रुकेगी हमारी गाड़ी | अब इस ब्रेकिंग की कंडीशन में 50 मीटर की दूरी में मोटर का क्या रिएक्शन रहता है इसको हम समझते हैं हमने मोटर की सप्लाई तो बंद कर दी ब्रेक लगाया था तब लेकिन अब गाड़ी 50 मीटर की दूरी तक चलेगी गाड़ी के इनरशीआ की वजह से और इस 50 मीटर की दूरी में गाड़ी के व्हील से मोटर को पावर मिलेगी यानी पहले मोटर गाड़ी को आगे बढ़ा रही थी लेकिन जब ब्रेकिंग कंडीशन आती है तब मोटर को पावर मिलती है गाड़ी के व्हील से और यही सिचुएशन जब हमारी गाड़ी ढलान में ब्रिज से उतर रही होती है तब भी यही कंडीशन पैदा होती है तो गाड़ी अपने आप ही इतनी फास्ट चलने लग जाती है कि गाड़ी में इंजन या मोटर है उसको तो काम करने की जरूरत ही नहीं है |

ब्रैकिंग और ढलान में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग

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तो इन दोनों ही सिचुएशन में जब दिल से पावर मिलेगी मोटर को तो यहां पर इंजन होगा तो इंजन का तो कोई रिएक्शन नहीं होगा इंजन तो फ्यूल कंजूस करता ही रहेगा जब तक उसको हम बंद नहीं करेंगे तब तक लेकिन मोटर को जो पहिये से पावर मिल रही है उस पावर को मोटर वापस इलेक्ट्रिक एनर्जी में कन्वर्ट कर देती है | यानी मैंने अभी जो आपको दो ऊपर सिचुएशन बताई थी या तो ढलान की कंडीशन में या फिर जब हम ब्रेक लगाते हैं तब उस टाइम मोटर जनरेटर की तरह काम करती है और इलेक्ट्रिसिटी जनरेट करके वापस गाड़ी का जो बैटरी पैक है उसमें स्टोर करने लग जाती है | और इसी को हम बोलते हैं रीजेनरेटिव ब्रेकिंग |

मोटर में ऐसा क्या होता है मोटर वापस इलेक्ट्रिक भेज देती है ?

मोटर में ही है जो वाइंडिंग होती है इसको बोलते हैं स्टेटर वाइंडिंग और यह जो बीच में रोटेट कर रहा है इसको रोटर बोलते हैं तो जब हम स्टेटर वाइंडिंग में सप्लाई देते हैं तो स्टेटर वाइंडिंग में रोटेटिंग मैग्नेटिक फील्ड इन शार्ट आरएमएफ जनरेट होता है एक ऐसा फिल्म जो रोटेट कर रहा है जब आरएमएस जनरेट होगा तो फ्लक्स जनरेट होगा और यह फ्लक्स पहुंचेगा रोटर तक | जब रोटर तक पहुंचेगा तब रोटर के अंदर भी रोटेटिंग मैग्नेटिक फील्ड जनरेट होगा जिससे रोटर के अंदर वोल्टेज करंट और टॉर्क जनरेट होगा अब रोटर क्या करेगा कि यह जो स्टेटर वाला रोटेटिंग मैग्नेटिक फील्ड है इसके पीछे-पीछे घूमना शुरू कर देगा यह कोशिश भी करता है इसके साथ-साथ में रोटेट करने की लेकिन यह इसको पकड़ नहीं पाता स्टेटर के रोटेटिंग मैग्नेटिक फील्ड और रोटर का आरएमएफ तो दोनों एक ही स्पीड में रोटेट करते हैं एकदम साथ साथ में ऐसा लगता है जैसे एक दूसरे के लिए रुके हुए हैं

स्लिप स्पीड क्या है ?

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लेकिन यार रोटर तो एक मैकेनिकल डिवाइस है तो वह इतना फास्ट नहीं रोटेट कर पाता है और यह इसके जस्ट पीछे पीछे घूमता है और आरएमएस और रोटर की स्पीड में जो थोड़ा सा फर्क है इसको हम कहते हैं स्लिप स्पीड और यह स्लिप स्पीड बहुत ही कम होती है इंडक्शन मोटर में जैसे आरएमएफ 1500 आरपीएम की स्पीड पर घूम रहा है तो रोटर 1480 आरपीएम की स्पीड पर रोटेट करेगा

सिंगल फेज और थ्री फेज इंडक्शन मोटर में से कौन से मोटर सेल्फ स्टार्टिंग होती है?

 

  • 3 फेज इंडक्शन मोटर सेल्फ स्टार्टिंग है
  • 1 फेज इंडक्शन मोटर सेल्फ स्टार्टिंग नहीं है

स्टेटर की सप्लाई

 

तो अभी तक हमने क्या देखा हमने स्टेटर को सप्लाई दी और फिर स्टेटर की सप्लाई को रोटर ने फॉलो किया यानी लीड यहां पर स्टेटर कर रहा है लेकिन रीजेनरेटिव ब्रेकिंग में क्या होता है जितनी पावर मोटर गाड़ी को आगे बढ़ाने में लगा रही थी उससे ज्यादा पावर अब गाड़ी के पास में आ गई है तो गाड़ी के व्हील मोटर को पावर वापस भेज रहे हैं यानी मोटर को अब गाड़ी के व्हील से पावर मिल रही है और गाड़ी के व्हील तो रोटर से जुड़े रहते हैं तो यहां पर सबसे पहले और रोटर में रोटेटिंग मैग्नेटिक फील्ड जनरेट होता है फिर फ्लक्स जनरेट होता है उसके बाद में यह फ्लक्स स्टेटर वाइंडिंग तक पहुंचता है |

जनरेटर मोटर से जस्ट ऑपोजिट होता है

स्टेटर वाइंडिंग में आरएमएस जनरेट करता है और स्टेटर वाइंडिंग का यह आरएमएस वोल्टेज और करंट प्रोड्यूस करता है तो इस केस में हमारा रोटर जो है वह लीड कर रहा है | यानी जनरेटर मोटर से जस्ट ऑपोजिट होता है यदि स्टेटर वाइंडिंग लीड कर रही है तो मोटर और मोटर वाइंडिंग लीड कर रही है तो जनरेटर कुल मिलकर बात यह है की इलेक्ट्रिक कार में एक ही मोटर जनरेटर का काम भी कर लेती है और मोटर का काम भी कर लेती है क्योंकि जनरेटर का कोई अलग कंसेप्ट तो है नहीं जस्ट मोटर का ऑपोजिट ही है तो असल में ब्रेकिंग के टाइम पर मोटर की पावर बंद नहीं होती है जब रोटका आरएमएस लीड करता है स्टेटस तो जितनी पावर मोटर लगा रही थी गाड़ी को आगे बढ़ाने में उससे ज्यादा पावर अब मोटर जनरेट कर रही है और वह जो एक्स्ट्रा पावर है उसको बैटरी पैक में वापस भेज देती है इस रीजेनरेटिव केस में मोटर खुद एक ब्रेकिंग का काम करती है मोटर खुद गाड़ी के व्हील को रोकने के लिए उन पर फोर्स लगाती है | इसलिए इसको ब्रेकिंग भी बोलते हैं लेकिन यह कोई ज्यादा पावरफुल ब्रेकिंग नहीं है क्योंकि जब मोटर जनरेटर की तरह काम करेगी तो मोटर के रोटर को घुमाने के लिए गाड़ी के व्हील पावर लगा रहे हैं और वही पावर एक ब्रेकिंग का काम करती है  |

मान लीजिये

अभी यहां पर मुझे आप एक बात बताओ हमारी गाड़ी को एक बार फुल चार्ज करने के बाद में यदि वह 400 किलोमीटर चलती है तो रीजेनरेटिव ब्रेकिंग और ढलान वाली कंडीशन आती है तो 400 किलोमीटर में से एक गाड़ी कितना किलोमीटर चल जाती है हम मैक्सिमम मानते हैं कि 5 किलोमीटर चल जाती होगी अब यदि 5 किलोमीटर चलती है तो मोटर 5 किलोमीटर की पावर वापस बैटरी में स्टोर कर देगी और पूरे 5 किलोमीटर की पावर भी मोटर बैटरी में स्टोर नहीं कर पाएगी क्योंकि बीच में कुछ लॉसेस भी हो जाएंगे तो मान लो 4 किलोमीटर का हमें बेनिफिट मिल गया | तो वह जैसा भी है एक बेनिफिट तो है यदि 400 किलोमीटर में से हमें 4 किलोमीटर एक्स्ट्रा मिल रहे हैं तो कुछ मिल तो रहा है इंजन वाली गाड़ी में तो हमें कुछ भी नहीं मिलता | इंजन वाली गाड़ी में ढलान पर यदि क्लच दबा के रखोगे तो क्लच फूक और जाएंगी | तुरंत इसका असर नहीं दिखेगा | आज नहीं तो कल | सर्विस के दौरान इसका पता चलेगा की बचत के चक्कर में नुक्सान कर बैठे है |

फ्री एनर्जी जनरेटर

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अब जो लोग फ्री एनर्जी जनरेटर बनाते हैं उनके हिसाब से यदि एक बार गाड़ी को फुल चार्ज कर दिया तो वह जिंदगी भर चलती रहेगी उनके हिसाब से गाड़ी हमेशा ढलान में ही चलेगी और गाड़ी को कभी चार्ज भी नहीं करना पड़ेगा पर क्या ऐसा हो सकता है मेरे हिसाब से तो बिल्कुल भी नहीं और यह एकदम साइंस के अगेंस्ट भी है यह लोग पहले इस फ्लाईव्हील के अंदर इस मोटर से एनर्जी को स्टोर करते हैं जैसे हम इलेक्ट्रिक कार में बैटरी को चार्ज करते हैं उस तरीके से फिर यह लोग इधर एक जनरेटर रखते हैं और यह जो जनरेटर इलेक्ट्रिसिटी जनरेट कर रहा है इसको वापस इस मोटर को दे देते हैं यानी जनरेटर इलेक्ट्रिसिटी जनरेट करेगा और मोटर को रोटेट करेगा और मोटर जनरेटर को रोटेट करेगी और इसमें जो हमें एक्स्ट्रा इलेक्ट्रिसिटी बच रही है उससे हम कुछ एक्स्ट्रा काम कर सकते हैं जैसे घर में कोई भी इक्विपमेंट है उनको चला सकते हैं |

गाड़ी के पिछले वाले टायर में एक मोटर लगा दो और गाड़ी के आगे वाले टायर में एक जनरेटर लगा दो

कहने का मतलब यदि आपके पास में इलेक्ट्रिक कार है तो या तो आप की इलेक्ट्रिक कार एक बार चार्ज करने के बाद में हमेशा ढलान में चलती रहे या फिर गाड़ी के पिछले वाले टायर में तो एक मोटर लगा दो जो गाड़ी को आगे चला दी जाएगी और गाड़ी के आगे वाले टायर में एक जनरेटर लगा दो ताकि आगे वाले टायर जनरेटर रोटेट करेगा और वापस बैटरी को चार्ज करता जाएगा तो फिर हमें तो कभी गाड़ी को चार्ज ही नहीं करना पड़ेगा ऐसे साइंटिस्ट यदि टेस्ला कंपनी को मिल जाते हैं तो उन्होंने जो बड़े-बड़े रिसर्च सेंटर खोल रखे हैं उनमें उनका पैसा नहीं लगता आप बताओ ना यार क्या ऐसा पॉसिबल हो सकता है हम लोग बेवकूफ कैसे बन जाते हैं एनर्जी को हम नाही तो क्रिएट कर सकते हैं ना ही डिस्ट्रॉय कर सकते हैं बस एक फॉर्म से दूसरे फॉर्म में बदल सकते हैं और यह चीज जब स्कूल में हम साइंस पढ़ना शुरू करते हैं तो सबसे पहले हमको यही चीज सिखाई जाती है और यह फ्री एनर्जी जनरेटर वाले तो एक नया ही कंसेप्ट ला रहे हैं जिसमें एनर्जी क्रिएट कर रहे हैं देखो यार साइंस कोई हार्ड सब्जेक्ट नहीं है बस यह है कई बार कि हम उसको समझ नहीं पाते हैं |

हम वाहन में डीसी मोटर का उपयोग क्यू नहीं करते है या उच्च टॉर्क भी उत्पन्न हारता है और लोड भी बहुत ज्यादा उठता है और बीएलडीसी मोटर तो ज्यादा लोड भी नहीं उठाती है ?

बीएलडीसी मोटर डीसी मोटर ही है जिस्का हाई टॉर्क है पर ये लाइट वेट व्हीकल के लिए बेस्ट है… डीसी मोटर यूज ना होने का सबसे बड़ा रीजन है इनमे ब्रश या कम्यूटेटर लगे होते हैं जिन्की वज से इनकी मेंटेनेंस कॉस्ट बढ़ जाती है |

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